पिछले दिनों...

पिछले कुछ दिन बड़े अजीब बीते...
बहुत सारे परदे उठे,
बहुतों की सच्चाई सामने आई...
पहले तो यकीन नहीं हुआ,
कि ये वाकई सच है...
दिमाग ने मान भी लिया...
पर दिल को समझाना जरा मुश्किल था...
धीर-धीरे वो भी समझ गया

लगा जैसे किसी जोर का तमाचा मार
नींद से जगा दिया दिया हो मुझे...
और एक सुन्दर-सा ख्वाब
जो देख रही थी मैं
उसे तोड़ दिया हो
चकनाचूर कर दिया...
तिमिर से निकाल मुझे
अचानक
दोपहर कि चिचालती धुप में ला खड़ा किया हो...
आँखे भी मिलमिला गयीं थीं...

पर धीर-धीरे उन्होंने भी
साचा के उजाले को,
उसकी तपन को अपना लिया...

सबसे बड़े आश्चर्य की बात
न जाने कहाँ से मुझमें
ये सहनशक्ति आ गयी
कि मैं उन चेहरों को
देख मज़े ले रही थी
मुस्कुरा रही थी
मुझे खुद नहीं पता कि
मेरा comfort-zone
अचानक इतना बड़ा कैसे हो गया...

पर...
जो हुआ
बहुत खूब हुआ
अच्छा हुआ...
मुझे इस यथार्थ को जाने का संयोग प्राप्त हुआ...

उन सभी चेहरों को
उन मुखौटों को शुक्रिया...

40 comments:

  1. अच्छा हुआ न तभी तो कहते है जब जागो तभी सवेरा

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  2. एक बेहतरीन कविता के साथ पुन: आगमन पर आपका हार्दिक स्वागत है.

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  3. बातों का सच अपने से कहीं अधिक तथ्य लेकर आता है।

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  4. Are wah! Kya khoob likha hai! Sach ko apna lenekee bhee himmat chahiye!

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  5. पूजा जी
    सदर प्रणाम ....
    आपकी कविता में यथार्थ पूरी तरह अभिव्यक्त हुआ है .....सच कहूँ तो आपकी कविता गजब ढा रही है ...शुभकामनायें

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  6. अच्छा हुआ जो मुखौटों के पीछे छिपा असली चेहरा आपने देख लिया.आज कल ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो एक के ऊपर एक न जाने कितने मुखोटों के पीछे असली चेहरा छिपाए रहते हैं.

    बहुत अच्छा लगा ये कविता पढ़ कर.

    सादर

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  7. दिमाग ने मान लिया ...दिल को समझाना मुश्किल ....एक तर्क से प्यार करता है तो दूसरा संवेदना से ....तो अंतर तो होगा ही ....बहुत बढ़िया ...शुक्रिया

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  8. सच से रु-ब-रु हो कर ऐसा ही लगता है

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  9. @प्रवीण जी, क्षम जी, केवल जी, यशवंत जी, संगीता जी... बहुत-बहुत धन्यवाद...
    @प्रवीण जी... जी सही है...
    @क्षमा जी... जी, पर हिमात अपने आप आ ही जाती है...

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  10. @केवल जी... नमस्कार...
    बहुत-बहुत शुक्रिया...
    जी अंतर तो होता ही है... पर अंतर ख़त्म भी हो जाते है...

    @यशवंत जी... जी सही है
    जहाँ देखिये ऐसे लोग मिल जाते हैं...

    @संगीता जी... जी...

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  11. पूजा जी !
    किसी शायर ने क्या खूब कहा है की ---
    हर आदमी में होते हैं दस-बीस आदमी ,
    जिसको भी देखना हो सौ बार देखिये ...

    सुंदर अभ्व्यक्ति ......आभार .

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  12. शुरू में होती है तकलीफ
    अन्दर झनाक से कुछ टूटा है
    पर भ्रम के परदे का हटना
    एक सुकून भी देता है ...

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  13. 'bazaron se kai mukhaute khareed lane ke din hain,
    asli chehra kabhi na kholen kuchh na kahen to achha hai.
    mukaute ke andar jhank liya to sachchaai samne aa gayee.
    yatharth ki sundar abhivyakti.

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  14. सच ऐसा ही होता है मगर साहस से अमन करने वाले कभी नहीं हारते

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  15. सच का तमाचा
    आह ! जेहन में बैठ जाता है
    पर आँखें खोल जाता है ...
    काबिलेतारीफ रचना

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  16. Hippocrates par karara prahar hai yah kavita... sundar kavita..

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  17. बहुत सुन्‍दरता से व्‍यक्‍त एक - एक शब्‍द ....बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

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  18. तुम्हारी क़लम तुम्हारे निडर और साहसी होने का प्रमाण है.तुम्हारी साफ़गोई और साहस के कारण मैं पहले एक बार अपने कमेन्ट में कह चुका हूँ कि जीवन में कोई तुम्हें धोखा नहीं दे सकता. बस तुम अपनी इस सोंच और इस जज़्बे को बरकरार रखना पूजा बेटा. जीवन में चाहे जितने उतार-चढ़ाव आयें,अपनी वर्तमान सोंच से कोई समझौता न करना.सफलता तुम्हारे क़दमों में होगी.
    तुम्हारी सोंच और तुम्हारी क़लम में बहुत दम है.

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  19. पूजा जी एकबार फिर एक सुंदर रचना.जब मन में किसी चीज या व्यक्ति का सकारात्मक पहलू बसा हो और उदघाटित होनेवाला सच उसके सर्वथा विपरीत हो तो ठीक वैसा ही होता है जैसा आपने प्रथम पैरा में लिखा है.दिमाग तो मान लेता हैं क्योंकि reasoning के सहारे अपने-आप को समझा लेता है,पर मन का कोई क्या करे जो टूटने के कगार पर पहुँच जाता है.बेहद खूबसूरती से मन की परतों को खोलती रचना के लिए बधाई.

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  20. poojaji behad sundar abhivyakti...hardik vadhayi!!!

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  21. @भाकुनी जी, बड़ी माँ, सुरेन्द्र जी, वंदना जी, सुमन जी, अरुण जी, सदा जी, कुंवर जी, राजिव जी, अंकुर जी... आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद...
    @भाकुनी जी... शेर के बहुत-बहुत धन्यवाद...
    @बड़ी माँ... पंक्तियों के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद...

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  22. aise hi mukhauto ke peeche chhupa hua hai sabka chehara...ye kab hatega koi nahi jaanta lekin ek din hatega jaroor ye vishvaas hai....

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  23. "Dil ko samjhana mushkil tha...."


    wah kya baat kahi pooja ji.

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  24. बहुत अच्छी रचना

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  25. mai chaahataa bhi yahee thaa wo bewafaa nikale,
    use samajhane kaa koi to silsilaa nikale.

    bebaak rachnaa. badhaee.

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  26. @रोहित जी, विक्रम, विक्की जी, वीणा जी, उन्कवि जी... बहुत-बहुत धन्यवाद...
    @उन्कवि जी... शुक्रिया... जी चाहत तो ऐसी ही थी...

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  27. Merry Christmas
    hope this christmas will bring happiness for you and your family.
    Lyrics Mantra

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  28. आज के युग की सच्चाई का बखूबी वर्णन किया है आपने इस कविता में...शुभकामनाएं।

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  29. सच्चाई को वयां करती हुई रचना , बधाई

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  30. जबाब नहीं निसंदेह ।
    यह एक प्रसंशनीय प्रस्तुति है ।
    धन्यवाद ।

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  31. @Harman, महेंद्र जी, सुनील जी, राजीव जी... बहुत-बहुत धन्यवाद...

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  32. बहुत अच्छा कविता है ।
    धन्यवाद ।

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  33. "समस हिंदी" ब्लॉग की तरफ से सभी मित्रो और पाठको को
    "मेर्री क्रिसमस" की बहुत बहुत शुभकामनाये !

    ()”"”() ,*
    ( ‘o’ ) ,***
    =(,,)=(”‘)<-***
    (”"),,,(”") “**

    Roses 4 u…
    MERRY CHRISTMAS to U…

    मेरी नई पोस्ट पर आपका स्वागत है

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  34. कितने मुखौटों को हटते हुए देख पाओगी. यथार्थ का जानना अच्छी बात है. मगर उसे सोचकर परेशां होने से अच्छा है कि जब जो जैसा नज़र आये उसे उस समय की सच्चाई मान लेनी चाहिये. वरना सच झूठ के मायने तो बदलते रहते है. तुम्हारी लिखावट तुम्हारे अंतर्मन को बखूबी दिखला देता है. एक तरह से कहते है कि लिख लेने से बातें उतनी कचोटती नहीं है. बहुत अच्छा लिखा है तुमने.

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  35. @smshindi, muskan, वंदना... बहुत-बहुत शुक्रिया...
    @वंदना जी... ह्म्म्म, शायद इसीलिए अब झुंझलाहट नहीं है, गुस्सा नहीं है... कहते हैं न कि जो होता है अच्छे के लिए होता है... बस हो गया... thank you again...

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  36. कड़वाहट से अधिक दुख देती है
    अकुलाहट
    अनजाने भय की आहट
    इससे जो बच पायें
    तो देवता न बन जायें

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