लम्हें...

कभी रूमानी
कभी बेईमानी
कभी धोखा
कभी ज़िन्दगानी...

कभी हँसते-गाते
कभी खाते-पीते
कभी पन्ने पलटाते
कभी कलम घिसते

कभी तेरी बाँहों में
कभी तेरी आँखों में
कभी तुझसे बतियाते
कभी तेरी यादों में

कभी खूबसूरत
कभी दर्द
कभी गुजारते-गुजारते थक गए
और कभी वो लम्हों में ही गुज़र गए...

49 comments:

  1. किन शब्दो मे और किस किस पंक्ति की तारीफ करू,
    सुन्दर कविता
    आभार

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  2. लम्हों का लम्बा सफर।

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  3. बहुत ही खूबसूरत और भावपूर्ण लम्हों का सफर..

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  4. वाह क्या बात है ...

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  5. वाह वाह!
    क्या बात है ...
    अलग अंदाज़

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  6. ...खूबसूरत तारीफ़ के लिए शब्द कम पड़ गए..

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  7. वाह!बहुत ही बढ़िया .

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  8. बहुत ही खूबसूरत शब्‍द रचना ।

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  9. न जाने क्या होते हैं लम्हें ..बस गुजर जाने के बाद ..आते हैं याद, चाहे अच्छे हों या बुरे ...लम्हें आखिर लम्हें हैं ....बहुत सुंदर

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  10. @दीपक जी, विनीत जी, प्रवीण जी, कैलाश जी, बब्बन जी, भाई, यशवंत जी, सदा जी, केवल जी, बड़ी माँ... बहुत-बहुत धन्यवाद... बस आप लोग यूँहीं मार्गदर्शन करते रहें...

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  11. बढ़िया / सुन्दर अभिव्यक्ति.

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  12. मकर संक्राति ,तिल संक्रांत ,ओणम,घुगुतिया , बिहू ,लोहड़ी ,पोंगल एवं पतंग पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

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  13. कविता बहुत सुन्दर और भावपूर्ण है। बधाई।

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  14. lamhom ke sundar baangi...
    sundar bhavpurn rachna ....

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  15. जय श्री कृष्ण...आप बहुत अच्छा लिखतें हैं...वाकई.... आशा हैं आपसे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा....!!

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  16. kuchh hi lamhon men nikal gayi kavita...dimaag ko ik ajeeb si kashmkash se bhar gayi kavita....!!

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  17. "आप सभी को मकर संक्रांति के पर्व की ढेरों शुभकामनाएँ !"

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  18. lamhon hath se nikal rahe hai, bas aur kuchh nahi ....

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  19. lajvab kavita.makar sankranti ki badhai.have a nice day

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  20. आपको भी वर्ष 2011 के पहले त्‍योहार मकर संक्रांति की ढेर सारी शुभकामनायें ...बधाई ।

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  21. बहुत सुन्दर लोहड़ी और मकरसंक्रांति की बहुत बहुत मुबारकवाद

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  22. मकर संक्रांति की आप को सपरिवार शुभ कामनाएं.

    सादर

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  23. @झंझट जी, कुंवर जी, भाकुनी जी, वर्षा जी, कविता जी, डिम्पल जी, राजीव जी, भाई, सुनील जी, जयकृष्ण जी, सदा जी, दीप जी, यशवंत जी... आप सभी का बहुत-बहुत शुक्रिया...
    यूँ ही हौसला बढ़ाते रहें...

    @डिम्पल जी... अभी तो मैं खुद ही सीख रही हूँ... पर उम्मीद है कभी-भी आपका गलत मार्गदर्शन नहीं करूंगी...

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  24. आपको मकर संक्रांति के पर्व की ढेरों शुभकामनाएँ !"
    स्वीकार करें

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  25. लम्हों कि पहचान करवा दी आपने .......क्या तारीफ करूँ आपकी कविता की....शुक्रिया

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  26. कभी खूबसूरत
    कभी दर्द
    कभी गुजारते-गुजारते थक गए
    और कभी वो लम्हों में ही गुजर गए

    बहुत भायी आपकी यह रचना ...तस्वीर भी रचनानुकूल लगाई है, आपने

    आभार !!!

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  27. सुन्दर है लम्हों का सफ़र.

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  28. पूजा जी प्रणाम!
    "कभी गुजारते गुजारते थक गए......और कभी वो लम्हों में ही गुजर गए"
    आपके लिखने का अंदाज काफी निराला है.......बहुत flow में लिखती है आप... अच्छा लगा आपके ब्लॉग पर आकर...गए......

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  29. पूजा जी,

    लम्हों के इस सफ़र में यह अच्छा सा लम्हा गुजरा जब रूह-ब-रूह हुआ लम्हों के सच से।

    बहुत अच्छी रचना।

    सादर,

    मुकेश कुमार तिवारी

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  30. कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है....

    अब ये दूसरी कविता घूमेगी...
    वैसे ये कभी-कभी बड़ा ही तंग करता है...कहना ही क्या इसके बारे में...कभी-कभी तो बस पूछिए ही मत, कभी कभी तो कुछ कहिए ही नहीं....जाने कभीकभी क्यों क्या कहें अब..चलिए कोई बात नहीं..कभी कभी कुछ नहीं चाहिए....

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  31. अच्छी रचना सुंदर भाव लिए हुए

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  32. @केवल जी, अनवर जी, मनोज जी, वंदना जी, प्रदीप जी, मुकेश जी, बोले तो बिंदास, अमरजीत जी... बहुत-बहुत धन्यवाद...

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  33. @केवल जी... इतना ही काफी था... शुक्रिया... :)

    @मनोज जी... शुक्रिया... बस यूँहीं मार्गदर्शन करते रहें...

    @प्रदीप जी... लोगों को पढने में अच्छा लगे इससे ज्यादा और क्या चाहिए लिखनेवाले को... शुक्रिया... आते रहिएगा....

    @मुकेश जी... जी सही कहा आपने... सच कोई भी हो, कैसा भी हो, देर से ही सही परन्तु अच्छा लगता है... शुक्रिया...

    @बोले तो बिंदास... क्या बोल दिया सर जी आपने... बहुत-बहुत शुक्रिया उस नज़्म के साथ जोड़ने के लिए जो अपने आप में मिसाल है... मैं उसके लायक तो नहीं परन्तु कोशिश करूँगीं कि ज़िन्दगी में एक चीज़ ऐसी करू... शुक्रिया...

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  34. बहुत ही प्रभावशाली रचना
    उत्कृष्ट लेखन का नमूना
    लेखन के आकाश में आपकी एक अनोखी पहचान है ..

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  35. देरी से आने का अफ़सोस है,मगर लम्हों के सफ़र से ढेर सारा शुकून मिला बहुत दिनों बाद जीवन के बहुत सारे पहलुओं को अपने-आप में समेटे हुए. सुंदर रचना के लिए बधाई.

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  36. पूजा
    अन्तरमन के भाव मुखारित हुए।
    ऐसा लिखती हैं आप भाव हिलोरे लेने लगते है।
    आभार

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  37. bahut hi khoobsoorat rachna...vadhai!!!

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  38. @मार्क, राजीव जी, भाए, अर्जुन जी... आप सभी का बहुत-बहुत शुक्रिया...

    @मार्क... अभी तो कुछ भी नहीं हूँ... पर हाँ एक कोशिश जरूर रहेगी कि लोग मुझे मेरे लिखने से याद रखें... धन्यवाद...

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  39. Waah kya baat hai bilul alag aur nirali rachna ......http://amrendra-shukla.blogspot.com/......

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  40. वाह बेटे
    यही गुजरना तो
    पूजा है
    इबादत है
    सच्‍चाई की

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  41. "कभी खूबसूरत लिखते हो
    कभी मन को मोहते हो"
    दुआ खुदा से
    ऐसे ही लिखते रहो

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  42. superb n amazing flow of melody :) keep going

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